चतुर और चालक मोची in Hindi moral story हिंदी कहानी।

चतुर और चालक मोची in Hindi moral story हिंदी कहानी

मूर्तिकार हरिया की-हिंदी कहानी

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप लोग बिल्कुल ही अच्छे होंगे। आशा करता हूं आप सभी मजे में होंगे। आज के इस ब्लॉग में हम लोग एक हरिया नाम के मूर्तिकार व्यक्ति के कहानी को हम लोग जानेंगे चलिए सूरू करते हैं।

दोस्त यह भले ही एक पत्थर की कहानी है। परंतु इसे जीवन में अपनाने के लिए बहुत ही बड़ा जिगरा चाहिए,।जो आपके पास है, इस कहानी को पढ़ने के बाद आप इस नियम का फॉलो जरूर करना। आपका जीवन मजे में  रहेगा। इससे आपको एक ऐसी तरीके की ही सीख मिलेगी आपको।
हरि नाम का एक मूर्तिकार था, अपने काम के सिलसिले में 1 दिन आस-पास के जंगलों में जाता और उस जंगल में जाकर अपने मूर्ति बनाने के लिए एक पत्थर को खोजने लगता है, तो उसे एक बेहतरीन पत्थर पर नजर जाती है,
जिसे उठाकर अपने गाड़ी में रख लेता है, और जब अपने घर के रास्ते में लौटता है, तो उसे एक और भी पत्थर नजर आती है। जो उससे भी अच्छी थी। इसलिए वह दोनों पत्थर को ही अपने गाड़ी में रख कर अपने कारखाने में चला जाता है।

 

जब मूर्तिकार उस पत्थर को मूर्ति बनाने के लिए उसे छेनी और हथौड़े की मदद से चोट मारता है, तो उस पत्थर से एक आवाज निकलती है, तो मूर्तिकार आस-पास देखने लगता है। तो उससे कोई भी नजर नहीं आता,
तो फिर से पत्थर को काटने लगता है। तो पत्थर से फिर आवाज आती है, मुझे बचाओ मैं तो मर ही गया,मुझे बचाओ मैं मर गया, यह आवाज आती है। तो उसकी नजर काट रहे पत्थर पर जाती है। तो मूर्तिकार यह सुनकर उस पत्थर पर तरस खा कर उसे एक तरफ रख देता है।
मूर्तिकार हरिया अपने मूर्ति बनाने के लिए दूसरे पत्थर का इस्तेमाल करता है। जिस पत्थर से बिल्कुल आवाज नहीं आती है। और नहीं किसी भी प्रकार का उसे कष्ट हो रहा हैं। जिससे वह हरिया मूर्तिकार अपनी गणेश की मूर्ति को बनाने में सफल रहता है, और कुछ ही देर में वह एक बहुत ही सुंदर और आकर्षक मूर्ति गणेश जी का बना देता है। जो मूर्ति उसे गांव के मंदिर में स्थापना करनी थी।

 

2 दिनों बाद गांव के लोग उसके पास आते हैं, और बोलते हैं। हरिया क्या तुम अपनी मूर्ति को बना लिए हरिया बोलता हां मैं इसे तो 2 दिन पहले ही बना लिया आप चाहे तो इसे ले जा सकते हैं,
अपने मंदिर में स्थापना करने के लिए यह कह कर हरिया वहां से चला जाता है, और सारे लोग मिलकर उस मूर्ति को एक गाड़ी में रहकर अच्छी तरह से उसे मंदिर की ओर ले जाने लगते हैं ,तभी उसमें से एक व्यक्ति को यह पता लगता है,
कि नारियल फोड़ने के लिए एक और पत्थर की जरूरत होती है जो कि हरिया मूर्तिकार के कारखाने में था। यह सोचकर वह मूर्ति के सामने रखने के लिए वह उस पत्थर को साथ लेकर चला आता है।
और गांव के मंदिर में जाकर गणेश जी की मूर्ति का स्थापना कर देते हैं। और उस रोने वाले पखल को गणेश जी के सामने रख देते हैं। जिस पर लोग आकर नारियल को तोड़ सके और स्थापना कर देते हैं।

 

मूर्ति बना पत्थर बहुत ही मजे में था। परंतु वह रोने वाला पत्थर बहुत ही उदास और मायूस था, क्योंकि मूर्ति बना पत्थर को फूलों और चंदन का लेप लगाया जाता और उसे प्रसादी मिलता खाने के लिए और रोने वाले पत्थर को केवल पिटाई मिलती जिसका कारण वह बहुत ही मायूस था।

 

रोने वाला पत्थर मूर्ति बना पत्थर को बोलता है। तुम तो भाई मजे में हो तुम्हें तो खाने के लिए प्रसादी और नहाने के लिए दूध जो मिल रहा है। तभी मूर्ति बना पत्थर बोलता है। तुम भी तो मूर्ति बनने ही जा रहे थे।
तो तुमने क्यों रोया तुम आज रोते नहीं तो आज तुम मेरे जगह होते मूर्ति बना पत्थर यह बोलता है। की जीवन में थोड़ी बहुत तो मुसीबत आती ही रहती है। अगर उसका ही सामना नहीं करो तो उससे भी बड़ा मुसीबत आता रहता है। इसीलिए जीवन में छोटी मोटी मुसीबत से हमें डरना नहीं चाहिए। उसे डट कर सामना करना चाहिए।

 

रोने वाला पत्थर बोलता है। हां’ भाई अगर मैं भी उस दिन उस मूर्तिकार का चोट को सहन कर पाता तो मैं भी आज तुम्हारे जगह रहता। लेकिन मुझसे उसकी चोट को सहा नहीं गया जिसके कारण मुझ पर उससे भी ज्यादा पर हार आज हो रही है।
लेकिन मैं कुछ कर भी नहीं सकता, तभी मूर्ति बना भगवान बोलता है, कि तुम भगवान पर विश्वास रखो तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है। अब तुम को किसी भी तरह का कोई भी परेशानी नहीं हो पाएगी,
तभी एक पुजारी आकर उस पत्थर पर नारियल फोड़ने जाता है। तभी उस पत्थर के मुंह से हे राम निकल जाता है। जिसके कारण उस पुजारी के नारियल एक ही बार में फूट जाता है,
और उस पत्थर को पता भी नहीं चलता कि नारियल फूट गया और नारियल के पानी उसके मुंह तक भी चला जाता है। जिसके कारण वह पत्थर बहुत ही खुश होता है और भगवान को धन्यवाद देते हुए बोलता है। आज के बाद मैं कभी भी छोटी-मोटी परेशानियों से कभी नहीं डरूंगा भगवान यह मेरा वादा।

 

जिसके कारण उस पत्थर को भी साथ-साथ पूजा जाने लगा और प्रसादी भी मिलती रही और दोनों पत्थर आपस में बातें करते और मजे करते।

 

इसी लिए। दोस्तो हम लोगों को कभी भी मुश्किल परिस्थितियों का डट कर सामना करना चाहिए। वरना उससे भी बड़ा मुश्किल आ जाता है। हमारे जीवन।

 

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