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KYC, e-KYC और CKYC क्या है KYC कैसे करवाएं.

KYC क्या है ? What is KYC ?

दोस्तों जब भी आप किसी  बिज़नेस  बॉडी जैसे कि bank, mutual funds, share market, post office, insurance, telecom सेवा या अन्य किसी भी संस्था  से कुछ जरुरी सेवाएं प्राप्त करते हैं

तो अपने कुछ documents , जो आपकी पहचान  और  पता बताते है,  जमा करवाते हैं.  इससे उस business बॉडी को आप के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त होती है. उसी के आधार पर वे आपको सेवायें प्रदान करते हैं.

इस पूरी process को ही आजकल KYC कहा जाता है. KYC  की फुल फॉर्म है Know Your Customer यानी अपने ग्राहक को जानो. यह एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा बैंक या अन्य संस्थाएं

ग्राहकों की पहचान और पते के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। इससे  यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती  है कि बैंकों की सेवाओं या  किसी भी प्रकार की सेवाओं का  दुरुपयोग न हो.

Reserve  Bank of India ने  KYC फॉर्म  को  2002  में Section 35A of the Banking Regulation Act,1949 के तहत सभी बैंको को जारी किया था और इसमें समय -समय   पर बदलाव भी किये जाते रहते हैं।

इसे 2016  में संशोधित भी किया गया था. भारत में यह प्रक्रिया हर बैंक या वित्तीय  संस्था के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वाराअनिवार्य घोषित की गई है ताकि प्रदान की जाने वाली सेवाओं का  किसी भी तरह दुरुपयोग न हो सके.

KYC क्यों अनिवार्य है ?

KYC का मुख्य उद्देश्य बैंको या संस्थाओं  के लिए अपने ग्राहकों को समझना आसान बनाना है. जैसे – (1) ग्राहकों को समझना और भविष्य के जोखिमों से बचना. (2) भ्र्ष्टाचार से बचना. (3) मनी लॉन्डरिंग जैसे fraud  से बचना. (4) अगर कोई धोखाधड़ी का काम होता भी है तो जल्द पकड़ा जाए.

KYC के लिए जरुरी Documents

KYC के लिए मुख्य रूप से  आपका photo पहचान पत्र और  address proof  अनिवार्य है.  ज्यादातर पहचान पत्रों में आपका पता भी होता है. यदि आपके द्वारा पहचान प्रमाण के रूप में प्रस्तुत documents में पते का विवरण नहीं है,

तब  आपको एक और आधिकारिक रूप से वैध document  जमा करना होगा जिसमें आपका पता शामिल हो. पहचान पत्र के लिए सरकार द्वारा प्रमाणित कुछ documents  जारी किये गए है जैसे कि :

(1) Aadhar Card  (आधार  कार्ड) (2) PAN कार्ड  (3) Driving Licence   (ड्राइविंग  लाइसेंस ) (4) Voter’s  Card  (5) Passport  (पासपोर्ट ) (6) NREGA Job Card.

इसके आलावा आपका पासपोर्ट साइज फोटो, जन्मतिथि का प्रमाण पत्र , email और वैध मोबाइल नंबर का होना भी जरूरी होता है. पहली बार KYC करवाने के लिए यह सब document जरूरी होते हैं.

KYC की गाइडलाइन्स

किसी  भी  बैंक में खाता खोलने के लिए आरबीआई ने KYC नॉर्म्स को 2002  मैं  अनिवार्य रूप से जारी किया था और इनको 1 जुलाई 2005 को लागू किया गया. 2002 में जब KYC गाइडलाइंस को जारी किया गया था

तब इनको पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा सका. इसके मुख्य उद्देश्य  तक पहुंचने के लिए आरबीआई ने बैंकों को अपने चालू खाता धारको  पर इसे लागू करने के लिए विभिन्न उपाय करने के लिए कहा.

इसके लिए  समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित किए गए तथा सभी ग्राहकों को अलग-अलग सूचित भी किया गया. अगर कोई बैंक KYC नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया तो वह Bank Regulation Act, 1949  के तहत  दंडनीय अपराध होगा.

RBI के हालिया दिशा निर्देशों के अनुसार बैंकों या अन्य सेवाएं प्रदान करने वाली संस्थाओं को मुख्य रूप से 4 तत्वों को ध्यान में रखते हुए अपनी केवाईसी पॉलिसी बनानी चाहिए.

(1) ग्राहकों  को रिस्क के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में पॉलिसी बनाना.

(2) विश्वसनीय और सही स्त्रोत के आधार पर अपने ग्राहक की पहचान को सत्यापित करना.

(3) जोखिम के आधार पर ग्राहकों के लेनदेन की प्रक्रिया की निगरानी रखना.

(4) समय-समय पर पॉलिसी के नियमों को  जरूरत पड़ने पर बदलते रहना.

KYC करवाने से क्या फायदा होगा ?

बैंकों या संस्था  के लिए :

(1) ग्राहक  की  पहचान स्थापित करना.

(2) ग्राहक की गतिविधियों की प्रकृति को समझने में मदद करता है जैसे की ग्राहक के पास आने वाला धन का स्त्रोत सही है.

(3) मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध के जोखिम का आकलन आसानी से किया सकता है.

(4) अवैध धन और लेनदेन के कारण धोखाधड़ी और नुकसान से सुरक्षा प्रदान करता है.

ग्राहकों के लिए :

(1) ग्राहकों की  जानकारी का दुरुपयोग नहीं होता और इसे गोपनीय भी रखा जाता है.

(2) ग्राहकों को लेन देन  की कोई असुविधा नहीं होती.

KYC से e-KYC : डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन

पिछले एक दशक में financial institutes और बैंकों ने digitalization को अपना लिया है. कंपनियां और संगठन ऐसी प्रक्रियाओं को बदलने और digitize  करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं,

जिनका automation  करना मुश्किल लग रहा था.  हालांकि artificial intelligent  और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों ने digitalization  को आसान बना दिया है.

e-KYC  क्या है ?  What is Adhaar based e-KYC ?

जैसा की आप जानते हैं की जिस सेवा के साथ “e”  लग जाता है उसका मतलब होता है की इलेक्ट्रॉनिक सेवा जो online internet के माध्यम से दी जाती  है।

इसलिए e-KYC का अर्थ है “Electronic Know Your Customer”.  e-KYC,  KYC process का ही digital रूप है.  e-KYC,  KYC प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा करने की सुविधा देता है.

इसमें आपको कोई भी फॉर्म  physically नहीं  भरना होता और कोई भी  डॉक्यूमेंट  physical रूप में जमा नहीं करना होता है.  इस का मुख्य उद्देश्य ग्राहक को कम से कम कागजी काम और कम से कम समय में पंजीकृत करना है.

आजकल savings और investment आदि सेवाओं का लाभ उठाने के लिए भी e-KYC का अनिवार्य रूप से प्रयोग किया जाता है. इसके आलावा मोबाइल connection लेने के लिए,

बैंक में खाता खुलवाने के लिए , ऑनलाइन म्यूच्यूअल फण्ड और शेयर्स खरीदने के लिए भी e-KYC प्रक्रिया काफी प्रचलित है. भारत मैं आधार कार्ड आधारित e-kyc यानी Adhaar based e-kyc काफी प्रचलित है।

आपके द्वारा ऑनलाइन प्रस्तुत की गयी जानकारी (online form भरते समय), को आधार कार्ड database में मौजूद आपकी पहचान जैसे फोटो, आपका पता यानि address,

आपकी जन्मतिथि (Date of Birth) आदि जानकारी के साथ मिलान करके सत्यापित करता है. इसे Adhaar Based e-KYC भी कहा जाता है.

e-KYC कैसे किया जाता है? क्या Documents जरूरी होते हैं?

e-KYC करने के लिए अलग अलग तरीके आजकल डिजिटल तकनीक के द्वारा विकसित किये जा चुके हैं. जैसे बायोमेट्रिक डिवाइस से फिंगरप्रिंट मिलाना , या रेटिना स्कैन (retina scan ) यानी आंखों की पुतलियों की स्कैन करना,

आवाज को मिलाना। आजकल यह तकनीक आधार कार्ड बनाते समय भी की जाती है, जिससे आपके fingerprints और retina की पूरी जानकारी आधार डेटाबेस में सुरक्षित रहती है.

इसलिए आधार e-KYC करते समय आपकी आधार कार्ड में मौजूद पूरी जानकारी जैसे आपकी पहचान, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर , ईमेल, आपका रिलेशन आदि

सिर्फ fingerprint या retina स्कैन के माध्यम से ऑनलाइन ही सत्यापित कर लिया जाता है. अलग -अलग दस्तावेज प्रस्तुत करने के वजाये आधार कार्ड को ही काफी माना जाता है.

हालांकि कहीं-कहीं कुछ सेवाओं के लिए आपको अतिरिक्त डॉक्यूमेंट जमा करवाने के लिए भी कहा जा सकता है. आजकल सरकार भी आधार based e-KYC को प्रोत्साहन दे रही है क्योंकि कई तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार को मदद मिलती है.

Online e-KYC के Steps

(1) किसी सेवा जैसे बैंक अकाउंट खुलवाने या मोबाइल कनेक्शन लेने के लिए आवेदन फॉर्म भरने के बाद उसमे दी गयी जानकारी सत्यापित करवाने के लिए आधार कार्ड नंबर प्रस्तुत किया जाता है. OTP (one time password ) के माधयम से आपके मोबाइल नंबर की भी पुष्टि की जाती है.

(2) आधार नंबर प्राप्त करने के बाद service provider आधार नंबर को Unique Identification Authority of India (UIDAI) को भेजता है और ग्राहक की सही पहचान की जानकारी मांगता है.

(3) Service provider, UIDAI द्वारा आपके मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP (one time password ) के माध्यम आपकी e-KYC details को UIDAI से प्राप्त कर लेता है. अगर आपकी जानकारी सही है तो यह इससे पुष्ट हो जाती है.

(4) इस तरह सेवा प्रदाता अपने ग्राहक की पहचान को पुष्ट कर लेता है और ग्राहक सेवा का लाभ उठाने के योग्य बन जाता है. इस पूरी प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है.

e-KYC के लाभ / Benefits of eKYC

(1) e-KYC से समय की बचत होती है क्योंकि आपको विभिन्न documents को इकठ्ठा नहीं करना पड़ता.

(2) कागजी काम कम होता है या नहीं होता है.

(3) दस्तावेजों को इकठ्ठा करने पर होने वाला खर्च भी बच जाता है.

(4) सारी जानकारी आधार कार्ड से ही verify कर ली जाती है. इसलिए कई बार फॉर्म भरते समय अपने आप पूरी जानकारी ऑटोफिल हो जाती है.

(5) Offline KYC में कई बार देखा गया है कि सेवा कई बार गलत व्यक्ति के नाम से ली जा रही होती थी, तो कई बार हस्ताक्षर की नक़ल करने जैसी धोखाधड़ी सामने आती थी. e-KYC से धोखाधड़ी की आशंका बहुत कम रह जाती हैं क्योंकि e-KYC से authentic व्यक्ति ही सेवा का लाभ उठा पाता है.

CKYC क्या है ? CKYC कैसे करवायें और CKYC नंबर कैसे चैक करें?

दोस्तो CKYC की फुल फॉर्म है ” CENTRAL KNOW YOUR CUSTOMER “. CKYC विभिन्न वित्तीय क्षेत्रों में सेवाओं का लाभ उठाने के लिए आपके KYC डाक्यूमेंट्स का centralised कलेक्शन है.

CKYC एक नए वित्त कंपनी के साथ एक नया वित्तीय संबंध शुरू करते समय सत्यापन के लिए KYC दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के बोझ को कम करने के लिए बनाया गया है।

यानी आपके KYC डाक्यूमेंट्स पहले से ही सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसी के पास रहते हैं जिससे आपको बार-बार KYC नहीं करवाना पड़ता। Central Registry of Securitisation Asset Reconstruction and Security Interest ऐसी ही एक एजेंसी है जो CKYC को मैनेज करती है.

CKYC की विशेषताएं

(1) CKYC एक 14 अंकों की संख्या है जो आईडी प्रूफ के साथ जुड़ा हुआ होता है.

(2) ग्राहक का डेटा सुरक्षित रूप से एक इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में store किया जाता है.

(3) प्रस्तुत दस्तावेजों को जारीकर्ता के साथ सत्यापित किया जाता है.

(4) KYC details में परिवर्तन होने पर सभी संबंधित संस्थानों को सूचित किया जाता है.

CKYC कैसे काम करता है?

इसे समझने के लिए मान लीजिये आपको शेयर मार्केट से कोई स्टॉक या फिर किसी फण्ड हाउस से म्यूच्यूअल फण्ड खरीदना है, तो आपको KYC फॉर्म भरना पड़ेगा और जरूरी डाक्यूमेंट्स को भी जमा करने होते हैं

जैसे cancelled check , फोटो आदि. अगर आप ऑनलाइन अप्लाई कर रहे है तो EKYC के माधयम से आपको ये प्रोसेस पूरी करनी होती है. आपके डाक्यूमेंट्स को CERSAI को भेजे जाते हैं और verify होने के बाद आपको 14 अंकों का CKYC न. दे दिया जाता है.

अब यदि आपको किसी दूसरे फण्ड हाउस से म्यूच्यूअल फण्ड खरीदना है तो आपको फिर से डाक्यूमेंट्स नहीं देने पड़ेंगे। आप सिर्फ अपना CKYC नंबर दे सकते है जिससे फण्ड हाउस अपने आप आपकी KYC डिटेल्स CERSAI से प्राप्त कर लेता है. इस तरह CKYC आपके निवेश की प्रक्रिया को आसान और परेशानी मुक्त बनाता है.

CKYC नंबर कैसे चेक करें

आप SEBI ( Securities and Exchange Board of India) द्वारा अधिकृत किसी भी Financial Institution जैसे ( KARVY, CDSL Ventures Limited (CVL),CAMS ) की वेबसाइट पर अपना CKYC नंबर चेक कर सकते है.

 

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